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पटना : पानी में फंसे लोगों के लिए ड्रोन बना भगवान, 5 हजार लोगों तक दवा, पानी और कपड़े पहुंचाए

पटना में 27 सितंबर से 29 सितंबर तक भारी बारिश हुई। मानसून की 40% बारिश 48 घंटे में हो गई थी।

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पटना (संदेशवाहक न्यूज डेस्क)। भारी बारिश के बाद पटना के हालात अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। 10 दिनों बाद शहर के राजेंद्र नगर समेत करीब 12 इलाकों में कुछ से पानी निकल चुका है तो कुछ में अभी भी भरा है। इस दौरान पानी में फंसे लोगों के लिए ड्रोन्स काफी मददगार बने। युवाओं ने ड्रोन की मदद से 5 हजार लोगों तक दवा, पानी और कपड़े पहुंचाए।

स्थानीय युवाओं की टीम और पटना यूनिवर्सिटी के 20 से ज्यादा छात्रों ने यह दावा किया है। इन्होंने कहा कि लोगों की मदद के लिए ड्रोन का सहारा लिया। 4 ड्रोन के जरिए उन लोगों से संपर्क साधा, जिनके पास न तो पीने का पानी था, न दवाई और न पहनने को कपड़े। युवाओं ने ड्रोन से चार दिन में 5 हजार से ज्यादा लोगों की मदद की। बारिश के दौरान बेघर हुए तीन हजार से ज्यादा लोगों को आसपास के घरों और मैरिज हॉल में रुकवाकर न सिर्फ उन्हें कपड़े उपलब्ध करवाए बल्कि खाने-पीने की व्यवस्था भी की।

अशोक राजपथ में रहने वाले युवक सुधीर ने बताया, “हमारा न तो कोई संगठन है और न ही कोई बैनर-पोस्टर। पीड़ितों की मदद करना हमारा लक्ष्य था। इसलिए हमने लोगों को आस-पास ठहराने की व्यवस्था की। करीब 2 हजार लोगों को अपने परिचितों के घरों और मोहल्ले के मैरिज हॉल में रुकवाया।”

उन्होंने बताया कि पास के रेस्टोरेंट की मदद लेकर इन्हें खाने के पैकेट पहुंचाए। सुधीर के अलावा उनके 6 से ज्यादा मित्रों ने इस काम में मदद की। डिज्जीवाले बाबू संस्था के फाउंडर प्रभाकर आलोक और उनकी टीम ने इन इलाकों में जरूरतमंदों को पर्चा के जरिए उनकी मांग को पूरा किया। इसके अलावा कई लोग हमसे जुड़े। दरअसल, सब लोग एकत्रित होते गए और कारबां बनता गया।

पटना नगर निगम में ड्रेनेज का नक्शा ही गायब हो गया। नगर निगम ने कहा कि वह कार्रवाई तो तब करेगा जब उसके पास ड्रेनेज का नक्शा हो। नक्शा खोजा जा रहा है। इसकी जानकारी स्थानीय नागरिक राजीव कांत को हुई तो उन्होंने अपने पास रखे नक्शे की फोटो कॉपी दी। तब ड्रेनेज को दुरुस्त करने का काम शुरू हुआ।

पटना में 27 सितंबर से 29 सितंबर तक भारी बारिश हुई। मानसून की 40% बारिश 48 घंटे में हो गई थी। कई इलाकों में 4 से 6 फीट तक पानी भर गया था। छह दिन तक करीब 3 लाख लोग अपने घरों में फंसे रहे।

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