- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

बारा​बंकी: शारदीय नवदुर्गा पूजा ने 50 साल किये पूरे, 400 रूप मे माँ दुर्गा ने दिये दर्शन

बच्चे मेहंदी गीत डांस सज्जा आदि कम्पटीशन में भाग ले रहे है।

0 63

बाराबंकी (संदेशवाहक न्यूज डेस्क)। पश्चिम बंगाल के बाद माँ दुर्गा के नौ रूपों की प्राण प्रतिष्ठा कर पूजा आराधना दर्शन सिर्फ बाराबंकी में ही होता है। शारदीय नव दुर्गा पूजा ने 50 साल पूरे कर लिये हैं इस लम्बे सफर में माँ दुर्गा के 400 रूप प्रदर्शित किए जा चुके हैं। दरअसल हर साल इस पूजा दुर्गा जी के सहस्त्र नाम से चुनकर रूपों को परिवर्तित किया जाता रहता है।

जी हां हम बात कर रहे है बाराबंकी नगर पालिका में चल रहे पूजा महोत्सव की। यूथ्स एसोसिएशन ने इसका आयोजन करना शुरू किया था। इस साल पूजा 50 साल पूरे कर स्वर्ण जयंती वर्ष मना रही है। आदिशक्ति के पर्व पर इस खास आयोजन का सपना जिले को अपना कर्मक्षेत्र बनाने वाले पत्रकार स्व.टी के राय ने अपने मित्र ब्रज लाल सालवानी के साथ देखा था। जो सबके सहयोग से साकार हो गया। आयोजन में सभी वर्गों के साथ ही भारी संख्या में बंगाली समुदाय भी एकजुट होने लगा। श्री राय के निधन के बाद इसकी कमान ब्रजलाल सालवानी ने संभाली और बेहद समर्पित स्थानीय टीम के साथ उन्होंने इसका सिलसिला जारी रखा। इस महोत्सव में शामिल होने के लिए हम जैसे ही नगरपालिका की ओर रुख करेंगे आपको एलईडी वाले खम्भो पर अलग से की गई सजावट मिलेगी।

प्रवेश के साथ ही जागता है भक्तिभाव

जैसे ही कदम पालिका के मुख्यद्वार पर पड़ेंगे भजन मंत्र की ध्वनि के साथ सामने ही माँ की एक आकर्षक प्रतिमा लगी दिखती है। बांए हिस्से में मेंहदी गीत डांस साज सज्जा आदि प्रतियोगिताओं के लिए हाईटेक स्टेज बना है। सामने ही फूलों से सजा सेल्फी प्वाइंट है। यहां माँ के दर्शन के साक्षी पलों को आप कैमरे में कैद कर सकते है। इसके बाद बारी आती है मुख्य सभागार की। सभागार भक्त और माँ के लिए दो भागों में बांटा गया है। एक तरफ बारी बारी से माँ के नौ सुसज्जित जीवंत मोहक रूप स्थापित है। दूसरी ओर निहारते उनके भक्त ।

माँ के रूप की आभा से हटती नही दृष्टि

हर रूप के आगे माँ का नाम लिखा है। सज्जा पर इतना बारीक कार्य कोलकाता के कलाकारों ने किया है कि एक बार प्रतिमा की आभा से जुड़ने के बाद नजर नही हटती। डिजिटल लाइट सिस्टम हर पल प्रकाश का रंग बदलता रहता है। इस तरह माँ का रूप कुछ पलों में ही मोहक मनमोहक अप्रतिम होता जाता है। स्वर्ण जयंती वर्ष होने के नाते इस बार मुख्यसभागार की छत को दिव्यता के साथ भव्यता दी गई। रंग बिरंगी पट्टियों के साथ लटकता झूमर किसी ऐतिहासिक फ़िल्म का सेट लगता है। शुक्रवार की रात यहां उम्मीद किरण संस्था के साथ आये दिव्यांग बच्चे सजधज कर मंच पर पहुंचे। माँ की पूजा की अनुभूति उनके चेहरों पर मुस्कान के रुप मे दिखाई पड़ी।

सुबह हो गई मंगल कलश की स्थापना

माँ की आराधना यहां नवरात्र की पंचम तिथि से शुरू होती है। षष्ठी को माँ का आवाह्न किया जाता है। शनिवार को सुबह कलश स्थापना हुई है शाम को आरती होगी फिर प्रसाद का वितरण होगा। ब्रजलाल सालवानी बताते है कि पूजा ने स्वर्ण जयंती मनाई है इसकी खुशी भक्तों में भी दिखाई पड़ी है। एक दिन में एक ही प्रतियोगिता में 900 बच्चों ने भाग लिया। भारी संख्या में लोग दर्शन कर रहे है पूजा के लिए तीन पुरोहित लगे हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

one × two =