- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

Browsing Category

साहित्य-संस्कृति

सामाजिक समरसता और अनुकरणीय है, मर्यादा पुरषोत्तम श्रीराम का जीवन: डॉ. वंदना सेन

भगवान राम ने अपने वनवास काल में समाज को एकता के सूत्र में पिरोने का काम पूरे कौशल के साथ किया।

अयोध्या के सांस्कृतिक और पौराणिक महत्व को बताएँगे, प्रशिक्षित गाइड

नगर आयुक्त डॉ. नीरज शुक्ला ने बताया, गाइड प्रशिक्षण के लिए एक शिफ्ट में 50-50 बच्चों के बैच चलाये जायेंगे। इसमें तमिल, गुजराती, मलयालम, साउथ कोरियन भाषाओं के…

लद्दाख जाने से पहले इन बातों का रखें विशेष ध्यान

यह बातें अगर आपको पहले से पता हो तो आपका सफर और भी आसान हो जाएगा। नीला आसमान, विशाल पहाड़ और झील का साफ नीला पानी ये सब ऐसी चीजें हैं जो आपको सिर्फ लद्दाख में…

क्राइम एंड पनिशमेंट नाटक का मंचन शनिवार को

लखनऊ (संदेशवाहक न्यूज)। विजय बेला, एक कदम खुशियों की ओर संस्था की ओर से शनिवार को हिंदी नाटक क्राइम एंड पनिशमेंट का मंचन किया जा रहा है। इस नाटक का…

ईश्वर की रची सृष्टि से खिलवाड़ क्यों

इस्लामिक विद्वान और धर्मगुरु अबुल हसन अली हसनी नदवी भले ही अब इस दुनिया में न हों, लेकिन उनके विचार अब भी मानवता की अलख जगाते हैं। अली मियां अपनी तकरीरों में जो…

सब्र ईमान का कड़ा इम्तेहान है रमजान शरीफ

बाराबंकी(संदेशवाहक न्यूज) ' तू मेरे सज्दों की लाज रख ले शुऊर-ए-सज्दा नहीं है मुझ को, ये सर तिरे आस्ताँ से पहले किसी के आगे झुका नहीं है' कुछ ऐसी ही एक रोज़ेदार…

पुस्तक समीक्षा : समाज की धड़कन है ‘साझा मन’ 

वसुधा जी ने अपने आसपास के परिवेश, वर्तमान समय में व्यवस्था में फैली अव्यवस्थाओं, विसंगतियों, विकृतियों, विद्रूपताओं के प्रति उनकी जो अनुभूतियाँ, संवेदनाएं हैं,…

जानिए उपन्यास सम्राट प्रेमचंद की कुछ प्रासंगिक बातें

यथार्थवादी चरित्रों को रचने वाले 'कलम के सिपाही' प्रेमचन्द का जन्म 31 जुलाई सन् 1880 को बनारस शहर से चार मील दूर लमही गाँव में हुआ था।

यथार्थ की बोध कराती हैं महाकवि निराला की रचनाएं

वह तोड़ती पत्थर, इलाहाबाद के पथ पर... रचना इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। उनकी रचनाओं में लोगों के दुख-दर्द की झलक तो मिलती ही है, यथार्थ का भी बेबाकी से बोध कराती…