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छठ व्रत निर्जला रहती है महिलाएं, इस विधि विधान से व्रत को करे सम्पन्न

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा का आयोजन किया जाता है।

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लखनऊ (संदेशवाहक न्यूज डेस्क)। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा का आयोजन किया जाता है। चार दिन के इस पर्व को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है। छठ व्रत में शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्धता का विशेष ख्याल रखा जाता है। छठ का व्रत करना इतना आसान नहीं है, इसमें कई नियमों का पालन करना पड़ता है जो सरल नही होते हैं।

सबसे कठिन व्रतों में से एक है छठ, घंटों निर्जला रहती हैं महिलाएं

हर व्रत में नियमों और साधना का पालन किया जाता है लेकिन छठ व्रत के नियम बहुत कड़े होतें हैं। छठ रहने वाली महिलायें 36 घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं। व्रत रखने वाली महिला को ‘परवैतिन’ कहा जाता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व पर व्रती को लगातार उपवास करना होता है।

36 घंटे का निर्जला व्रत

चार दिनों का ये व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक है। ये व्रत बड़े नियम और निष्ठा से किया जाता है। 36 घंटे तक चलने वाले इस व्रत को निर्जला किया जाता है यानी इस व्रत में 36 घंटे तक पानी भी नहीं पिया जाता है। खरना पर प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही महिलाओं का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। भगवान सूर्य के लिए 36 घंटों का निर्जला व्रत स्त्रियों इसलिए रखती हैं ताकि उनके सुहाग और बेटे की रक्षा हो सके। वहीं, भगवान सूर्य धन, धान्य, समृद्धि आदि प्रदान करते हैं।

व्रत के साथ काम भी

छठ का व्रत रखने वाली महिलाएं अपने हाथ से ही सारा काम करती है। नहाय-खाय से लेकर सुबह के अर्घ्य तक व्रती सभी निष्ठाओं का पालन करती है।

बिस्तर पर नही सोती

छठ के पर्व में व्रती को भोजन के साथ ही बिस्तर पर सोने का भी त्याग करना पड़ता है। छठ पर्व में व्रती का एक अलग कमरे में फर्श पर एक कंबल या चादर पर सोना इस परंपरा का एक हिस्सा है।

व्रत रखते हुए प्रसाद बनाना

छठ पर्व का व्रत रखने वाली महिलाएं छठ का प्रसाद खुद ही बनाती है। इस व्रत में साफ-सफाई का बहुत ध्यान रखा जाता है।

बीच में नहीं छोड़ा जाता है व्रत

अगर छठ का व्रत एक बार शुरू कर दिया जाए तो ये सालों साल तब तक करना होता है, जब तक कि घर परिवार की अगली पीढ़ी की कोई विवाहित महिला इसे करना शुरू न कर दे।

छठ पूजा के दौरान भूलकर भी ना करें ये 10 गलतियां

चार दिनों तक चलने वाला छठ का महापर्व 31 अक्टूबर से शुरू हो जाएगा। छठ पूजा सूर्य देव की उपासना कर उनकी कृपा पाने के लिए की जाती है। मान्यता है कि सूर्य देव की कृपा से घर में धन-धान्य का भंडार रहता है। छठी माई संतान प्रदान करती है। सूर्य सी श्रेष्ठ संतान के लिये भी ये उपवास रखा जाता है।

छठ पूजा को सबसे कठिन व्रत माना जाता है क्योंकि इसके नियम बहुत कड़े होते हैं। छठ पूजा में सफाई का बहुत महत्व है। छठ पूजा का प्रसाद बनाने वाली जगह साफ-सुथरी होनी चाहिए। प्रसाद को गंदे हाथों से न तो छूना चाहिए और न ही बनाना चाहिए।

सूर्य भगवान को जिस बर्तन से अर्घ्य देते हैं, वो चांदी, स्टेनलेस स्टील, ग्लास या प्लास्टिक का नहीं होना चाहिए। छठ पूजा का प्रसाद उस जगह पर नहीं बनाना चाहिए जहां खाना बनता हो। पूजा का प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर ही पकाएं। छठ व्रतियों को बिस्तर पर नहीं सोना चाहिए। व्रत करने वाली महिलाओं को फर्श पर चादर बिछाकर सोना चाहिए। प्रसाद बनाते समय कुछ भी खाना नहीं खाना चाहिए। प्रसाद बनाते वक्त और पूजा के दौरान हर किसी को साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए। बिना हाथ धोए पूजा के किसी भी सामान को न छुएं। बच्चों को छठ पूजा का प्रसाद जूठा न करने दें जब तक छठ पर्व संपन्न ना हो जाए।

छठ पूजा के दौरान सात्विक भोजन करें। लहसुन-प्याज के सेवन से दूर रहें। इन्हें घर पर भी न रखें। छठ पूजा में व्रत रख रहे लोगों को अपशब्दों और अभद्र भाषा का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

छठ महापर्व की तैयारियां शुरू, 31 से 4 दिन का त्योहार

छठ पूजा के त्योहार को महापर्व कहा जाता है। ये पर्व कार्तिक मास के षष्ठी को मनाया जाता है इसलिए इसे छठ पर्व कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि छठ पूजा के चार दिनों के दौरान सूर्य और छठी माता की पूजा करने वाले लोगों की हर मनोकामना पूरी होती है। बिहार समेत देश के तमाम हिस्सों में छठ पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। बांस की डलिया और सूप बनकर तैयार हो गई हैं और श्रद्धालु इन्हें खरीदने के लिए घरों से निकल रहे हैं।

छठ पूजा में बांस की सूप-डलिया का बहुत महत्व होता है। व्रती महिलाएं इनमें ही पूजन सामग्री लेकर घाट तक जाती हैं। बाजार में मिट्टी के चूल्हे मिलने शुरू हो गए हैं। छठ पूजा का सारा प्रसाद इन मिट्टी के चूल्हों पर ही बनता है। इस मिट्टी के चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर प्रसाद बनाने का काम किया जाता है। छठ पूजा के लिए घाटों की सफाई की जा रही है। आपको बता दें 31 अक्टूबर से नहाय खाय के साथ छठ पूजा व्रत की शुरुआत होगी।

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