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ह्यूस्टन में मोदी के मायने

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प्रद्युम्न तिवारी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सात दिवसीय दौरे पर शनिवार को अमेरिका पहुंचे। हालांकि सफर की थकान मिटाने के बजाय पीएम कुछ घंटों बाद ही अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों के सीईओ स्तर के अधिकारियों के साथ गोलमेज बैठक पर नजर आए। भारत ने इन अमेरिकी कंपनियों से करीब ढाई अरब डॉलर से अधिक के तेल और गैस आयात के समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए। ऐसे में जबकि खाड़ी मुल्कों में बढ़े तनाव के कारण जहां ऊर्जा बाजार में संकट गहराया है, भारत जैसे बड़े तेल आयातक मुल्क की चिंताएं भी बढ़ी हैं। अपनी जरूरत का 80 फीसद तेल व गैस आयात करने वाला भारत अपने विकल्पों के लिए निश्चिंतता तलाश रहा है, जिसमें अमेरिका उसका भरोसेमंद साथी हो सकता है। ऊर्जा कंपनियों के साथ बैठक में मोदी ने भारत में नए निवेश की संभावनाओं को भी तलाशा। रविवार को पीएम मोदी का पहला पड़ाव ह्यूस्टन शहर रहा। उन्होंने हाऊडी मोदी कार्यक्रम में जिस तरह शिरकत की और वहां उन्हें जिस तरह हाथोंहाथ लिया गया, उससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही नहीं, अन्य देशों के प्रमुख भी चकित रह गए। उन्होंने वहां बसे कश्मीरी पंडितों के जख्मों पर मरहम तो लगाया ही, कश्मीर से 370 हटाने के औचित्य को भी बखूबी समझाया।

मोदी के अमेरिका दौरे के कई खास मायने हैं। सबसे बड़ा आकर्षण ह्यूस्टन शहर के एनआरजी स्टेडियम में आयोजित हाऊडी मोदी कार्यक्रम ही रहा। यह अमेरिका में मोदी का अब तक का सबसे बड़ा संवाद कार्यक्रम रहा। कार्यक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद रहे। पोप के अलावा अन्य किसी विदेशी नेता के लिए यहां आयोजित किए गए कार्यक्रमों में यह सबसे बड़ा रहा। यह भी पहली बार हुआ जब अमेरिकी धरती पर राष्ट्रपति औऱ भारतीय पीएम की मुलाकात न्यूयॉर्क या वाशिंगटन से बाहर हुई। मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों के साथ अलग से भी मुलाकात की। कार्यक्रम के लिए ह्यूस्टन को इसलिए चुना गय़ा क्योंकि न्यूयार्क, सैन फ्रांसिस्को और वाशिंगटन डीसी में मोदी के कार्यक्रम पहले हो चुके हैं। टेक्सास इंडिया फोरम लोकसभा चुनाव से पहले ही मोदी को बुलाना चाहता था लेकिन तब यह संभव नहीं हो सका था। ह्यूस्टन में ही तेल और प्राकृतिक गैस की बड़ी कंपिनयों के मुख्यालय हैं। ह्यूस्टन दुनिया के सबसे बड़े मेडिकल सेंटर में भी गिना जाता है। टेक्सास मेडिकल सेंटर से बीते कुछ माह में एम्स समेत भारत के कई अस्पतालों से करार भी हुए हैं। आयुष्मान भारत के तहत भारतीयों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उलब्ध कराने की चर्चा भी मोदी के एजेंडे में है।

दरअसल मोदी के कार्यक्रम से सिर्फ भारत को ही फायदा होगा, ऐसा नहीं है। ट्रंप भी मोदी की छवि को अमेरिका में अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में भुनाना चाहेंगे। इस चुनाव में एशियाई मूल के लोगों, खासतौर पर अमेरिकी भारतीयों की अहम भूमिका होती है, क्योंकि अमेरिका में 20 प्रतिशत लोग एशियाई देशों के हैं। वोटरों की संख्या के लिहाज से भारतवंशियों का अमेरिकी राजनीति में काफी दबदबा है। परंपरागत रूप से भारतवंशियों का झुकाव डेमोक्रेटों की तरफ रहा है जबकि ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी के हैं। मोदी के साथ इस मेगा शो के मंच को साझा करने की सहानुभूति रिपब्लिकन पार्टी को मिल सकती है। टेक्सास में करीब डेढ़ लाख भारतीय हैं, जो संगठित, सुव्यवस्थित, प्रभावी और समृद्ध हैं। भारत और अमेरिका के साझा मूल्य हैं और कारोबारी जरूरतें भी समान हैं। भारत को पांच ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य प्राप्त करने में इस क्षेत्र से अहम मदद मिल सकती है। अतः भारत को इस मौके पूरा फायदा उठाकर दूरगामी हितों को साधना चाहिए।

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