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पाक की बेहयाई

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प्रद्युम्न तिवारी।

पाकिस्तान बालाकोट में फिर आतंकी अड्डे सक्रिय कर चुका है। पाकिस्तान के कम से कम पांच सौ आतंकी फिर भारत में घुसपैठ करने की फिराक में हैं। भारत के थल सेनाध्यक्ष जनरल विपिन रावत के इस बयान से साफ पता चलता है कि आतंक और कश्मीर मुद्दे पर दुनिया भर में रुसवाई का पात्र बने पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आने वाला। भारत द्वारा बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद वहां आतंकी शिविरों का खात्मा हो गया था लेकिन पाकिस्तान एक बार फिर उन्हें सक्रिय करके भारत के साथ छद्म युद्ध को बढ़ावा देने की साजिश रच रहा है। पर, हमारी सेना इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। रावत ने कहा भी कि हर बार बालाकोट जैसी स्ट्राइक ही क्यों, इस बार जो होगा, उसे पूरी दुनिया देखेगी और पाकिस्तान के लिए अपने आपको बचाना भी मुश्किल होगा। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान एक दिन पूर्व भी अमेरिकी राष्ट्रपित ट्रंप से हुई मुलाकात में उनकी खरी-खरी सुन चुके हैं। पाकिस्तान एक तरफ तो यह कहता है कि वह भी आतंक से परेशान है लेकिन दूसरी ओर यह स्वीकारोक्ति उसे कटघरे में खड़ा करती है कि उसने समय-समय पर खुद आंतकियों की मदद की है।

दरअसल भिखमंगों की लाइन में खड़े इमरान खान को यह नहीं सूझ रहा है कि वह करें तो क्या करें? उन्हें यही लग रहा है कि पाकिस्तानी सेना की कठपुतली बनकर ही वह सुरक्षित रह सकते हैं। पर, वह अपने देश तथा वहां की सेना के चरित्र को शायद पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। पाकिस्तानी सेना भी जब देखेगी कि इमरान किसी काम के नहीं रहे, तो वह उन्हें उखाड़ फेंकने में भी देर नहीं करेगी। इमरान को यह भलीभांति समझ लेना चाहिए कि भारत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात समझाने में सफल हो चुका है और इस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात को सभी राष्ट्र प्रमुख तवज्जो देते हैं। ह्यूस्टन में जिस तरह वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप की मौजूदगी में मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए उस पर हमला बोला, उससे ट्रंप भी सहमत नजर आए। इतना ही नहीं, दोनों देशों ने आतंक से साथ मिलकर लड़ने का संकल्प भी दोहराया।

पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर दुनिया के हर मंच पर भारत से मात खा चुका है। पर, पाकिस्तानी सेना के इशारे पर इमरान जिहाद की आड़ में हिंसा फैलाने की जो साजिश रच रहे हैं, वह उन्हीं के विपरीत जाएगी। वहां की जनता भी इस बात को भलीभांति समझ रही है और आने वाले समय में यदि इमरान के खिलाफ वहां बड़ा जनमत खड़ा हो जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। ऐसा नहीं है कि भारत अथवा अन्य देश पाकिस्तान की चालों को समझ नहीं रहे हैं। विपिन रावत के पहले भारतीय विदेश मंत्रालय भी पाकिस्तान की इसी नीयत को देखते हुए उसे चेता चुका है कि अपने नापाक मंसूबों को त्यागे अन्यथा भारत की ओर से जो जवाब दिया जाएगा, उससे पाकिस्तान का उबरना मुश्किल होगा। दुनिया के कई मुल्कों ने पाकिस्तान को सलाह भी दी कि वह द्विपक्षीय मुद्दों को वार्ता के जरिये ही हल करे। पर, पाकिस्तान यह समझने को तैयार ही नहीं है।

दरअसल पाकिस्तान को असली डर पीओके को लेकर है। वह समझ रहा है कि भारत की नजर अब पीओके पर है, इसीलिए वह पेशबंदी कर रहा है। कश्मीर में अब उसे अलगाववादियों का साथ मिलना भी मुश्किल हो रहा है, इसीलिए उसकी बौखलाहट में और बढ़ गई है। पर, उसने अपनी साजिश नहीं छोड़ी तो उसे इसका भरपूर खामियाजा उठाना पड़ेगा।

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